Rajasthan: कुत्ते की मौत के बाद मालिक ने अखबार में दिया तीये की बैठक का ऐड, 2 दिन से घर में नहीं बना खाना, AC में रहता था मींकू

Vijay Chauhan

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Rajasthan: चूरू में एक कुत्ते की मौत के बाद अजीबोगरीब मामला सामने आया है. जहां कुत्ते (मींकू) की मौत के परिवार ने दुख जताते हुए न्यूजपेपर में तीये की बैठक का विज्ञापन दे डाला. मींकू की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है. पिछले 2 दिनों से घर में किसी ने खाना तक नहीं खाया. मामला चूरू तहसील के गांव बास ढाकान का है.

मींकू जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता था. जिसकी बीमार हो जाने से मौत हो गई. परिजनों की मींकू की मौत के बाद गहरा झटका लगा है. मालिक अरविन्द ढाका ने भरे हुए गले से बताया कि मींकू उनके परिवार और जीवन का हिस्सा बन गया था. जिसकी मंगलवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सीएचएफ कंजेटिव हार्ट फैलियर नाम की बीमारी की मौत हो गई. ढाका ने बताया कि मींकू की मौत पर उसे ऐसा महसूस हुआ की जैसे उसकी संतान या भाई की मौत हो गई है. परिवार में मातम छा गया है. नम आंखों के साथ परिवार के लोगों के साथ मींकू को अपने ही खेत में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. 

2014 में हिसार से लाए थे

मालिक अरविन्द ढाका का कहना है कि 2014 में जब मींकू एक माह का था तो उसे हिसार से खरीद कर लाया था. धीरे-धीरे वह परिवार का एक हिस्सा बन गई थी. करीब डेढ़ साल पहले वह बीमार हो गई थी. जिसको हिसार में हिसार वेटनरी कॉलेज में दिखाया था. जहां पशु चिकित्सकों ने बताया कि मींकू के कंजेटिव हार्ट फैलीयर नाम की बीमारी हो गई, जिससे करीब सौ मीटर चलने के बाद ही उसकी सांस फूलने लग जाती थी. जहां उसकी काफी जांचे करवाकर दवाई दिलायी गई. मगर फिर डॉक्टर ने बताया कि कुत्ते की उम्र करीब 14 से 15 साल ही होती है. जबकि मींकू के उम्र का भी असर है. उन्होंने बताया कि जह मींकू को पहली बार हिसार लेकर गये थे. तब करीब 40 हजार रुपए खर्च हुए थे. 

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सांप से बचायी थी परिवार के लोगों की जान

ढाका ने बताया कि साल 2018 में जब एक रात परिवार के लोग कमरे में सोये हुए थे. तभी काले रंग का कोबरा सांप घर में आ गया था. जो मेरे कमरे में घुस रहा था. तभी मींकू मेरे बेड के पास आकर जोर-जोर से भोंकने लगा और मुझे जगाया. इसके बाद मींकू मुझे गेट के पास लेकर गया. वहां काले रंग का कोबरा छीपा हुआ था. तब जाकर सांप को मारा गया. 

दूध, दही, पनीर खाता था मींकू

मींकू की डाइट का विशेष ध्यान रखा जाता था. मींकू शुरू से शाकाहारी था. सुबह-शाम दूध रोटी दी जाती थी. वहीं सप्ताह में दो तीन बार उसको पनीर भी खिलाया जाता था. बीमार होने के बाद डॉक्टर की सलाह पर सप्ताह में एक बार चिकन मटन खिलाते थे. वह परिवार के लोगों के साथ मिठाई भी खाता था.

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घर में उसके लिए लगवाया था AC

ढाका का कहना है कि दिन में परिवार के लोगों से खाना ले लेता था. लेकिन रात को मेरे ही हाथ का खाना खाता था. काम की सिलसिले में जिस दिन घर नहीं आता था तो मींकू रात को खाना नहीं खाता था. उन्होंने बताया कि मींकू के लिए कमरे में डेढ़ टन की एसी लगवाया था. वहीं खुद के कमरे में मींकू के अलग से छोटा बेड लगाकर रखता था. वह उसके उपर हीं सोता और बैठता था. मींकू के बीमार होने के बाद ढाका ने हिसार से एक छोटा डॉगी लिया है. ढाका का कहना है कि वह कभी मींकू की जगह नहीं ले सकता. 
 

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