विश्वराज सिंह के पिता और दादा हो गए थे आमने-सामने, जानिए मेवाड़ राजघराने के संपत्ति विवाद के बारे में

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Property dispute in mewar royal family: राजस्थान विधानसभा चुनाव (rajasthan election 2023) में नाथद्वारा (nathdwara) सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है. यह मेवाड़ की हॉट सीट बन गई है. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी (dr. cp joshi) के सामने मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य विश्वराज सिंह मेवाड़ (vishvaraj singh mewar) उम्मीदवार हैं. जिसके बाद से मेवाड़ का यह पूर्व राजघराना चर्चा में है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस राजघराने का एक विवाद अदालत की चौखट तक पहुंचा? यह विवाद था राजघराने की संपत्ति का. जिसमें मेवाड़ के आखिरी महाराणा भगवत सिंह पर उनके ही बेटे और विश्वराज सिंह मेवाड़ के पिता महेंद्र सिंह मेवाड़ ने अपने पिता भगवत सिंह के खिलाफ केस कर दिया था. जब उदयपुर कोर्ट ने 37 साल बाद वर्ष 2020 मे फैसला सुनाया तो इस मामले में वर्ष 2022 मे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी और मेवाड़ के आखिरी महाराणा भगवत सिंह के छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ की इसमें जीत हुई थी. आज बात राजघराने के इसी संपत्ति विवाद से जुड़ी…

दरअसल, ये पूरा झगड़ा उदयपुर सिटी पैलेस से ही जुड़ी तीन अलग-अलग प्राॅपर्टी पर है. इनमें राजघराने का शाही पैलेस शंभू निवास, बड़ी पाल और घास घर शामिल है. एक अनुमान के मुताबिक इन तीनों प्रॉपर्टी की वैल्यू करीब 60 हजार करोड़ रुपए है.

पूरा मामला महाराणा भगवत सिंह द्वारा प्रॉपर्टी को विक्रय पर देने से शुरु हुआ. जब उन्होंने साल 1963 से 1972 तक राजघराने की कई प्रॉपर्टी को बेच दिया, लीज पर दिया और पब्लिक ट्रस्टस मे प्रोपर्टी सेटल कीय आलीशान होटल लेक पैलेस (जग निवास), जग मंदिर, फतह प्रकाश, शिव निवास, गार्डन होटल के अलावा सिटी पैलेस म्यूजियम जैसी बेशकीमती प्रॉपर्टीज को इसमें शामिल किया गया था. जब महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ ने यह सम्पतियो के सम्बन्ध फैसला लिया तो उनके बेटे महेंद्र सिंह मेवाड़ उनके साथ थे परन्तु वर्ष 1983 मे अपने ही पिता के फैसलो से नाराज हो गए और कोर्ट मे सम्पतियो के बटवारे का वाद दायर कर दिया.

क्या था महेंद्र सिंह मेवाड़ का तर्क

महेंद्र सिंह ने कोर्ट में केस करने के दौरान कहा कि सभी सम्पतियां पैतृक सम्पतियां होकर मिताक्षरा विधि से शासित होती है और महेंद्र सिह ने अपना हिस्से की मांग की. गौरतलब है कि महेन्द्र सिंह ने रूल ऑफ प्रोइमोजेनेचर प्रथा को छोड़कर सम्पतियो को पैतृक संपत्तियों होना क्लेम किया. आजादी के बाद लागू हुए हिन्दु उतराधिकार अधिनियम के अनुसार पूरी संपत्ति मे उसका हिस्सा देने की बात कही गई थी. इसी को आधार बनाते हुए महेंद्र सिंह मेवाड़ ने अपना पक्ष रखा. जिसके खिलाफ उनके भाई और भगवति सिंह मेवाड़ के छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ ने अपना पक्ष भी दिया कि सभी सम्पतिया रूल ऑफ प्राइमोजेनेचर के तहत अविभाज्य है.

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वहीं, 3 नवम्बर 1984 को भगवत सिंह का निधन हो गया. गौरतलब है कि भगवत सिंह की वसीयत को भी महेन्द्र सिह ने सर्वोच्च न्यायालय तक चुनौती दी, लेकिन जीत अरविन्द सिंह मेवाड़ की हुई. उच्च न्यायालय के फैसले दिनांक 28 जून 2022 को महेंद्र सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय मे चुनौती दी, परन्तु वहां भी महेंद्र सिंह को हार ही हाथ लगी।

बढ़ गई पिता-पुत्र के बीच दूरियां

कहा जाता है कि इसी केस के चलते विश्वराज सिंह मेवाड़ के पिता और उनके दादा के बीच दूरियां बढ़ गई. दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक अपने बेटे के इस केस  से भगवत सिंह नाराज हो गए. भगवत सिंह ने बेटे के केस पर कोर्ट में जवाब दिया कि इन सभी प्रॉपर्टी का हिस्सा नहीं हो सकता. ये इमपार्टेबल एस्टेट यानी अविभाजीय है. जिसके बाद 15 मई 1984 को उन्होंने अपनी वसीयत में संपत्तियों का एग्जीक्यूटर छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ को बना दिया और महेंद्र मेवाड़ को प्रॉपर्टी और ट्रस्ट से बाहर कर दिया. वहीं, 3 नवम्बर 1984 को भगवत सिंह का निधन हो गया.

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अरविंद सिंह मेवाड़ शंभू निवास और महेंद्र मेवाड़ समोर बाग में रहने लगे. प्रॉपर्टी से बाहर करने के बाद महेंद्र सिंह मेवाड़ और उनके छोटे भाई अरविंद सिंह मेवाड़ के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया. दोनों अलग-अलग हो गए. मेवाड़ के अलग-अलग धड़े ने अपने-अपने अनुसार दोनों काे समर्थन दिया. इसके बाद अरविंद सिंह मेवाड़ शंभू निवास और महेंद्र सिंह मेवाड़ समोर बाग में रहने लगे. इसी के चलते आज सिटी पैलेस में अरविंद सिंह मेवाड़ के बेटे डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और समोर बाग में महेंद्र मेवाड़ के बेटे विश्वराज सिंह मेवाड़ समोर बाग में रहते हैं.

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उदयपुर कोर्ट ने सुनाया हैरान करने वाला फैसला!

37 साल सुनवाई चलने के बाद उदयपुर की जिला अदालत ने 2020 में एक चौंकाने वाला फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि जो संपत्तियां भगवत सिंह ने अपने जीवनकाल में बेच दी थीं, उन्हें दावे में शामिल नहीं किया जाएगा. इस फैसले के बाद सिर्फ तीन संपत्ति शंभू निवास पैलेस, बड़ी पाल और घास घर ही बची, जिसे बराबर हिस्सों में बांटा जाना था.

कोर्ट ने सम्पत्ति का एक चौथाई भगवत सिंह, एक चौथाई महेंद्र सिंह मेवाड़, एक चौथाई बहन योगेश्वरी को और एक चौथाई अरविंद सिंह मेवाड़ को दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने यह कहा कि शंभू निवास पर 1 अप्रैल 2021 से 4-4 साल के लिए महेंद्र मेवाड़, योगेश्वरी और अरविंद सिंह रहेंगे.

अरविंद सिंह मेवाड़ शंभू निवास में 35 साल रह लिए थे. ऐसे में 1 अप्रैल 2021 से चार साल महेंद्र मेवाड़ और चार साल योगेश्वरी देवी को रहने के लिए कहा गया. इस दौरान संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग पर भी कोर्ट ने रोक लगाई. इसके बाद घास घर और बड़ी पाल पर कॉमर्शियल कार्यक्रम नहीं किए गए.

हाईकोर्ट में मिली अरविंद सिंह मेवाड़ को बड़ी राहत

उदयपुर कोर्ट के फैसले के खिलाफ 30 अगस्त 2020 को अरविंद सिंह मेवाड़ हाईकोर्ट पहुंच गए. उन्होंने 3 अलग-अलग अपील दायर की. पहली अपील अरविंद सिंह ने खुद पार्टी बनते हुए दायर की, दूसरी अपील वसीयत के एग्जीक्यूटर की हैसियत से और तीसरी अपील दादी वीरद कुंवर के कानूनी वारिस के रूप में दायर की गई. इस अपील के बाद सभी पार्टियों ने सहमति दी की इस मामले में अभी कोई कार्यवाही नहीं करेंगे. जिसके बाद 28 जून 2022 को हाईकोर्ट ने उदयपुर कोर्ट के फैसले और उसे लागू करने पर रोक लगा दी. यह रोक अपीलों के अंतिम निर्णय तक के लिए लगाई गई. इस फैसले के बाद अब शंभू निवास, घास घर और बड़ी पाल तीनों अरविंद सिंह मेवाड़ के पास ही रहेंगे.

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