Rajasthan Budget: "जब जनता पर नहीं लगा था किसी भी तरह का टैक्स", जानिए राजस्थान के पहला टैक्स-फ्री बजट के बारे में

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आज 10 जुलाई को भजनलाल सरकार का पहला पूर्णकालिक बजट पेश होगा. इस बजट से राजस्थान को कई उम्मीदें हैं. इससे पहले फरवरी में सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था. जिसके बाद लोकसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लग गई थी. पिछले महीने 4 जून को चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार का कामकाज फिर से पटरी पर आ चुका है. इन सबके बीच हम आपको बता रहे हैं राजस्थान (Rajasthan Budget) के पहले टैक्स-फ्री बजट के बारे में. जो राजस्थान के चौथे मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल के कार्यकाल में पेश किया था. 

बता दें कि 1 नवंबर 1952 को जयनारायण व्यास जब राजस्थान के मुख्यमंत्री बने तो पालीवाल को डिप्टी सीएम बनाया गया था. इसके साथ ही वह देश के उन गिने चुने मुख्यमंत्रियों में शामिल हो गए जो सीएम रहने के बाद डिप्टी सीएम बने हों.  

भूमि सुधार का जनक कहे जाने वाले पालीवाल की लोकप्रियता इतनी थी कि 1952 में मुख्यमंत्री रहते जयनारायण व्यास जोधपुर और जालौर दोनों जगह से चुनाव हार गए थे. लेकिन पालीवाल महवा और मलारना दोनों जगह से चुनाव जीते. जयनारायण व्यास के चुनाव हारने के बाद पालीवाल को सीएम बनाया गया. 3 मार्च 1952 को सीएम बनने वाले पालीवाल महज आठ माह इस पद पर रहे. वह राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री थे. वह महज 8 माह तक इस पद पर रहे.

जानिए कैसे बनाया गया था पहला टैक्स फ्री बजट

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दरअसल, पालीवाल ने इस बजट में जनता पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया था. बहुमुखी प्रतिभा के धनी टीकाराम की प्रारम्भिक शिक्षा मंडावर, राजगढ़ व दिल्ली में हुई. वे मेरठ न्यायालय में अधिवक्ता भी रहे. इस दौरान उनका कांग्रेस पार्टी के नेताओं से सम्पर्क हुआ. उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में भी भागीदारी निभाई. हालांकि परंपरा के अनुसार उन्होंने खुद बजट पेश नहीं किया था. इसकी जगह तत्कालीन वित्त मंत्री नाथूराम मिर्धा ने उनकी जगह बजट पेश किया था. मात्र 17 करोड़ 25 लाख रुपये के इस बजट की ज्यादातर घोषणाएं सिंचाई, पेयजल और सूखे से संबंधित योजनाओं पर केंद्रित थी.

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