Budget 2023: गहलोत के पिटारे से किसानों के लिए क्या होगा खास? पहले कृषि बजट में क्या मिला, जानें

ललित यादव

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Budget 2023: राजस्थान की 15वीं विधानसभा का आखिरी बजट शुक्रवार 10 फरवरी को पेश किया जा रहा है. मुख्यमंत्री गहलोत अपने तीसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करेंगे. बजट में किसानों और युवाओं के लिए विशेष प्रावधान लाने की चर्चा हो रही है. सीएम गहलोत ने 2022-23 के बजट में पहली बार कृषि बजट अलग से पेश किया था. यह पहली बार हुआ जब सालाना बजट से हटकर किसानों के लिए अलग से पूरा बजट तैयार पेश किया गया. लेकिन बजट में कर्जमाफी और एमएसपी की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को ऐसा कुछ नहीं मिला. अब आने वाले बजट को लेकर किसान सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे हैं.

चुनावी साल को देखते हुए 2023-24 का बजट तैयार किया है. सीएम गहलोत अपने 4 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में कह चुके हैं. इस बार का बजट युवाओं और किसानों के लिए खास रहने वाला है. ऐसे में किसानों के लिए क्या नई चीजें होने वाली है. इसके अलावा पहली बार अपने कृषि बजट में सीएम गहलोत ने क्या-क्या घोषणाएं की. उनकी चर्चा करते हैं.

किसानों को नए बजट से उम्मीदें

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पिछले साल किसानों के लिए स्पेशल बजट लाकर सीएम गहलोत ने किसान हितैषी छवि बनाने की कोशिश की. लेकिन अब विपक्ष सीएम गहलोत के ऋण माफी बाले बयान को फिर हवा दे रहा है, ऐसे में किसानों को इस बजट में राष्ट्रीय बैंकों के ऋण माफ होने की उम्मीदे हैं. वहीं किसानों से जुड़ी अनेक योजनाओं में सब्सिडी बढ़ाई जाने की भी चर्चा हो रही है. किसानों को आवारा पशुओं से काफी नुकसान झेलना पड़ता है इसके लिए सीएम गहलोत तारबंदी से जुड़ी कोई सब्सिडी योजना ला सकते हैं.

राज्य की जीडीपी का करीब 6 फीसदी हिस्सा कृषि बजट में
समृद्ध किसान- खुशहाल राजस्थान के मोटो के साथ सीएम गहलोत ने 2022 में अपना पहला कृषि बजट पेश किया. इससे 85 लाख किसानों को साधते का प्रयास किया गया. प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 30 प्रतिशत है. उसी के आधार पर सीएम गहलोत ने राज्य की जीड़ीपी का 5.9 फीसदी हिस्सा कृषि बजट के लिए आवंटित किया. सीएम गहलोत ने अपने पहले बजट में किसानों के हित में 11 मिशन बनाने की घोषणा की. इसमें ERCP के लिए 9600 करोड़ का प्रावधान किया गया. वहीं कृषि के लिए कुल बजट 78,938 करोड़ रूपए का पेश किया गया.

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2022 के कृषि बजट में ये 11 मिशन प्रस्तावित किए

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1. राजस्थान सूक्ष्म सिंचाई मिशन – इस मिशन के तहत 2700 करोड़ रुपए आवंटित किए गए. जिसके तहत 4 लाख से अधिक किसानों को ड्रिप/फव्वारे से सिंचाई करने के लिए इस योजना का लाभ ले सके. साथ ही फार्म पॉण्ड निर्माम के लिए भी राशि अनुदान की गई.

2. राजस्थान जैविक खेती मिशन- इस मिशन में 600 करोड़ रुपए आवंटित किए गए. जिससे किसान अपने खेतों जैविक क्षेत्र में नवाचार कर सके. उसके लिए अनुदान की व्यवस्था की गई. संभाग स्तर पर ऑर्गेनिक कमोडिटी लैब स्थापित की व्यवस्था की गई.

3. राजस्थान बीज उत्पादन एवं वितरण मिशन – इस मिशन के माध्यम से करीब 12 लाख लघु/सीमांत किसानों को प्रमुख फसलों के प्रमाणित किस्मों के बीज के मिनीकिट निशुल्क उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई.

4. राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन – इस मिशन के तहत 100 रुपए रुपए व्यय कर 15 लाख से अधिक किसानों को फायदा दिया जाने की व्यवस्था की गई. मिलेट की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर सके.

5. राजस्थान संरक्षित खेती मिशन – इसके तहत किसानों को ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, लो टनल की स्थापना की व्यवस्था की गई. इसमें अधिसूचित जनजाति क्षेत्र के किसानों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी की व्यवस्था दी गई.

6. राजस्थान उद्यानिक विकास मिशन – इसके तह 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फल-बगीचे विकसित करने, मसाला फसलों के लिए जमीम का विस्तार करने के लिए अनुदान की व्यवस्था की गई.

7. राजस्थान फसल सुरक्षा मिशन – आगामी 2 वर्षों में 35 हजार से ज्यादा किसानों के लिए तारबंदी करने के लिए अनुदान की व्यवस्था की गई.

8. राजस्थान भूमि उर्वरकता मिशन – भूमि सुधार तथा हरि खाद के प्रयोग से भूमि उर्वरता बढ़ाने के लिए मिशन की शुरूआत की गई. इससे किसानों को हरी खाद के लिए ढैंचा बीज निशुल्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं.

9. राजस्थान कृषि श्रमिक संबल मिशन – किसानों को हस्तचालित कृषि यंत्र खरीदने के लिए अनुदान की व्यवस्था की गई. साथ ही स्कील बिल्डिंग के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई.

10. राजस्थान कृषि तकनीक मिशन – कृषि उत्पादन में लगने वाली लागत को कम करने तथा कम समय में अधिक कार्य के लिए यंत्रीकरण के लिए 400 करोड़ रुपए अनुदान की व्यवस्था की गई.

11. राजस्थान खाद्य प्रसंस्करण मिशन – इसके तहत मधुमक्खी पालन के अनुदान, लहसुन, अनार, संतरे, जीरा, इसबगोल, टमाटर, सरसों की खेती के लिए सहायता राशि की व्यवस्था की गई.

वन टाइम सेटलमेंट पर केंद्र सरकार को घेरा
सीएम गहलोत ने कृषि बजट को 11 भागों में बांटकर किसानों की हर तरह से मदद का प्रयास किया. इसका लाभ कई योजनाओं के तहत किसानों को मिला. लेकिन लगातार विपक्ष गहलोत सरकार पर किसानों के बजट माफी को लेकर सवाल पूछ रही है. लेकिन सीएम गहलोत किसानों द्वारा राष्ट्रीय बैंकों द्वारा लिए गए कर्ज को लेकर पीएम मोदी को घेर चुके हैं. वह पीएम मोदी से कई बार मांग कर चुके हैं कि वह किसानों के कर्ज को वन टाइम सेटलमेंट की सहमति दें बाकि वह पूरा कर्ज राज्य सरकार चुका देगी. इसके अलावा सीएम गहलोत ने ईआरसीपी परियोजना के लिए पिछले बजट में ईआरसीपी कॉर्पोरेशन बनाया जिसमें 9600 करोड़ का प्रावधान किया.अब सीएम गहलोत ईआरसीपी कॉर्पोरेशन में राशि बढ़ा सकते हैं.

पिछले बजट में किसानों के लिए हुई प्रमुख घोषणाएं
सीएम गहलोत ने पहली बार प्रदेश में अलग से कृषि बजट पेश किया. इसमें सबसे प्रमुख घोषणा मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना के बजट को 2 हजार करोड़ से बढ़ाकर 5000 करोड़ कर दिया. इससे किसानों को ऋण, सब्सिडी और अन्य कार्यों में राहत मिली. किसानों को ऋण को माफ किया और काफी ऋण कॉ-ऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से किसानों को दिए हैं. इससे छोटी जोत के किसानों को बिना ब्याज के ऋण मिला है.

कृषि एक्सपर्ट इस बजट में लगाए बैठे ये उम्मीदें
कृषि क्षेत्र के एक्सपर्ट बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि किसान इस बजट में मुख्यमंत्री से कई घोषणाएं होने की उम्मीद कर रहे हैं. गुप्ता बताते हैं कि राजस्थान में हर साल करीब 55 लाख टन सरसों की फसल की बंपर पैदावार होती है. अभी राजस्थान में बंजर भूमि काफी मौजूद है. अगर सरकार किसानों को उन जमीनों पर 50 फीसदी की सब्सिडी के साथ उपजाऊ बनाने की स्कीम लेकर आती है तो किसानों को फायदा मिलेगा. राजस्थान में सरसों की पैदावार में 40 फीसदी का इजाफा होगा और किसानों को फायदा मिलेगा. इसके अलावा इसबगोल, जीरा और धनिए की फसल अच्छी मात्रा में होती है. लेकिन किसानों के ज्यादा पेस्टीसाइड डालने से पैदावार में कमी आई, इसके लिए सरकार को प्रोत्साहित करने की आवश्यक है. ताकि वह किसानों को सब्सिडी या अन्य माध्यम से सहयाता करे ताकि किसान कम पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करें.वहीं मोटे अनाज पर सीएम गहलोत से किसान उम्मीद कर रहे हैं. वहीं किसान उम्मीद कर रहे हैं कि बाजरे की खरीद एमएसपी पर की जाए.

बाजरे की सरकारी खरीद
केंद्र सरकार ने बाजरे पर एमएसपी 2350 रुपए प्रति क्विंटल किया है लेकिन राजस्थान में सरकार रेट पर खरीद नहीं होने से किसानों को 700 से 800 रुपए क्विंटल बाजारा का नुकसान हो रहा है. देश में राजस्थान में सबसे अधिक बाजरे की पैदावार हो रही है. इससे किसानों की आय में कमी आ रही है. वहीं हरियाणा, एमपी, महाराष्ट्र और गुजरात में बाजरे का एमएसपी पर खरीदा जाता है. जबकि कुल पैदावार का करीब 50 प्रतिशत बाजारा राजस्थान में पैदा हो रहा है. प्रदेश में हर साल करीब 90 लाख टन बाजरे की बंपर पैदावार हो रही है.

किसानों के कर्जमाफी पर फैसला
राजस्थान में इस चुनावी बजट में किसानों के कर्ज को लेकर भी बड़ा फैसला किया जा सकता है. जानकार मान रहे हैं कि सरकार किसानों के लिए कॉपरेटिव बैंक द्वारा ऋण माफी की सीमा बढ़ा सकती है. साथ ही राष्ट्रीय बैंकों के कर्ज माफी पर कुछ फैसला कर सकती है. राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के लिए किसान कर्ज माफी पूरे कार्यकाल में मुद्दा बना रहा. 2018 चुनावों से पहले राहुल गांधी ने कर्जमाफी का ऐलान किया था. कॉपरेटिव बैंकों का कर्ज माफ भी किया गया लेकिन बीजेपी लगातार अधूरे वादे को लेकर सरकार को घेरती रही. ऐसे में इस बार माना जा रहा है कि केंद्रीय बैकों के कर्ज माफ करने को लेकर भी कोई घोषणा हो सकती है.

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