Rajasthan: ब्राह्मण-राजपूत समाज की मांग; हमारा हो CM, प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो ‘नोटा’ का प्रयोग

विशाल शर्मा

ADVERTISEMENT

Rajasthantak
social share
google news

Rajasthan: राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव है, जिसको लेकर प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों ने कमर कस ली है. तो वही कांग्रेस और बीजेपी में तो मानों कई दिग्गज अभी से ही अपने आप को मुख्यमंत्री का दावेदार समझने लग गए, लेकिन जनता के दिलों में कुछ और ही है. यह बात तय है कि चुनाव कौनसा भी हो, जाति और वर्ग का बोलबाला जरूर रहता है. यहीं वजह है कि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में जिस जाति के वोट ज्यादा होते हैं उसी अनुसार पार्टियां अपने उम्मीदवार को खड़ा भी करती है.

अब चुनाव के वक्त भला ब्राह्मण और राजपूत समाज कहा पीछे रहने वाला था. इन्होंने भी 200 विधानसभा क्षेत्रों में से 140 सीटों पर सीधे-सीधे अपने समाज से उम्मीदवार खड़ा करने की पार्टियों से मांग कर दी है. इसमें 70 सीटों पर ब्राह्मण और 70 पर राजपूत समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र भी लिखा है. यहीं नहीं इस मांगों को लेकर उन्होंने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और बीजेपी चीफ सतीश पूनिया को भी अवगत करवाया है.

राजस्थान तक के खास कार्यक्रम चौपाल में डॉ श्याम सुंदर सेवदा ने बताया कि विगत 75 वर्षों में जान बूझकर दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने आशापूर्वक भारत को भारत बनाने वाले ब्राह्मण और राजपूत समाजों की अपेक्षा दयनीय स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है. इस तरह अब दोनों ही समाजों के लोगों के लिए यह अत्याचार सहन करने की सीमा समाप्त हो गई है. अब दोनों समाजों ने संयुक्त रूप से पूरे राजस्थान में ब्राह्मण और राजपूत समाजों को एक मंच पर लाने का दृढ संकल्प लेते हुए बिना क्रोध, बिना विरोध किए अब आगे के 30 वर्षों तक दोनों बड़ी पार्टियों भाजपा व कंग्रेस में से कोई भी एक बार ब्राह्मण को एक बार राजपूत को मुख्यमंत्री बनाए.

ADVERTISEMENT

यह भी पढ़ें...

वहीं दलपत सिंह ने बताया कि दोनों बड़ी पार्टियां अनारक्षित 140 सीटों में से 71 सीटों पर राजपूतों को और 70 सीटों पर ब्राह्मणों को टिकट देवे. साथ ही आरक्षित सीटों पर वर्ष 1961 से पहले के दो सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र के संविधानिक अधिकार को फिर से बहाल करके चुनाव लड़ने का अधिकार दिया जाए. यदि दोनों बड़ी पार्टियों ने चुनाव से तीन महीने पहले इन इन दोनों समाजों को लेकर अपना मत स्पष्ट नहीं किया तो राजपूत और ब्राह्मण समाज मिलकर कठोर निर्णय लेते हुए मतदान के समय नोटा का बटन दबाएंगे.

प्रदेशवासियों को आज मिलेगा सरप्राइज? CM गहलोत कर सकते हैं इन 6 जिलों की घोषणा, देखें

ADVERTISEMENT

    follow on google news
    follow on whatsapp

    ADVERTISEMENT