Rajasthan: राजस्थान में हार के बाद भी बाजीगर कैसे बनी कांग्रेस, बीजेपी को किस बात हो रही पीड़ा?

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Rajasthan: लोकसभा के चुनाव खत्म हो चुके हैं, जो नतीजे आए हैं उसका विश्लेषण करें, तो पता चलता है कि राजस्थान में बीजेपी जीतकर भी हार गई और कांग्रेस हारकर भी बाजीगर बन गई है. अब जीत हार, सफलता, नाकामी हर चीज का पोस्टमार्टम करने की तैयारी है,

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Rajasthan: लोकसभा के चुनाव खत्म हो चुके हैं, जो नतीजे आए हैं उसका विश्लेषण करें, तो पता चलता है कि राजस्थान में बीजेपी जीतकर भी हार गई और कांग्रेस हारकर भी बाजीगर बन गई है. अब जीत हार, सफलता, नाकामी हर चीज का पोस्टमार्टम करने की तैयारी है, दिल्ली में मंथन चल रहा है, कि आखिर बीजेपी इतनी कम सीटों पर कैसे सिमट गई, तो वहीं कांग्रेस वाले भी सफलता का सेहरा बांधने की तैयारी में हैं, किस पर गिरेजी गाज और किसके सिर सजेगा ताज...आज हम इसी पर बात करेंगे.

 सियासत में मतभेद दो पार्टियों में होते हैं, लेकिन लोकसभा के चुनाव में जिस तरह से देखा गया कि बीजेपी में बहुत से नेताओं ने एक दूसरे का साथ ही नहीं दिया. यहां तक कि कई बड़े नेता भी चुनाव मैदान में प्रचार करने तक नहीं आए, और जो नेता आए भी उन्हें भी अपनों का सपोर्ट काफी कम मिला, जिसका नतीजा ये रहा कि बीजेपी जीती हुई बाजी भी राजस्थान में हार गई. किरोड़ी लाल मीणा अकेले ही मेहनत करते रहे, प्रचार में पूरी ताकत  झोंक रखी थी, लेकिन दूसरी ओर वसुंधरा राजे काफी सुस्त दिखीं, उन्होंने प्रचार तो किया लेकिन सिर्फ अपने बेटे दुष्यंत सिंह की सीट बारां-झालावाड़ पर. जहां से दुष्यंत सिंह चुनाव तो जीत गए, लेकिन मोदी के मंत्रिमंडल में उन्हें जगह नहीं दी गई. पांच बार के सांसद रहे दुष्यंत सिंह जब मंत्री नहीं बने तो मां वसुंधरा को भी इस बात का काफी मलाल हो गया, महारानी इन दिनों दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं और अपने पुराने साथी नेताओं से मुलाकात कर रही हैं.  

किसे मिलेगी सजा?

बीजेपी अब क्या करने वाली है, किसी को नहीं पता, लेकिन इतना तो तय है कि राजस्थान में पार्टी की जो दुर्दशा हुई है उसका खामियाजा किसी ना किसी को तो जरूर उठाना होगा. बीजेपी आलाकमान पूरी नजर बनाए हुए है, जल्द ही गाज गिरेगी, देखिए ...कौन बचता है और किसका पत्ता साफ होता है. उधर कांग्रेस पार्टी खुश है, जीत का सेहरा सचिन पायलट के सिर बांधने की तैयारी की जा रही है. 

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कहीं हार का मलाल तो कहीं जीत की खुशी, कांग्रेस और बीजेपी का राजस्थान में कुछ ऐसा ही हाल है. भले ही केन्द्र में इंडिया गठबंधन की सरकार ना बन पाई हो, लेकिन जो सफलता राजस्थान में कांग्रेस ने हासिल की है, उससे कांग्रेस में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है, इसमें कोई दो राय नहीं. खबर है कि सचिन पायलट को फिर से प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा दिया जा सकता है,हालाकि कई लोग इस बात से इनकार भी करते हैं, कि ऐसा कुछ होगा भी. बहरहाल सचिन ने जो किया है वो जगजाहिर है, राहुल सोनिया, प्रियंका सबको मालूम है, ऐसे में अगर पायलट को इनाम मिलता है, तो कुछ लोगों को छोड़कर पार्टी में सबको खुशी ही होगी. 



 

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