राजस्थान में कैसे मजबूत होगी कांग्रेस, कैबिनेट मंत्री ने पत्रकारों को बताया

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फोटो: हेमाराम चौधरी के ट्वीटर से ली गई है.
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Rajasthan News: राजस्थान में 25 सितंबर को कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे से उपजा विवाद प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से ठीक पहले फिर सुर्खियों में है. अब अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री हेमाराम चौधरी ने बयान दिया है कि 25 सितंबर की घटना पर अब तक कोई निर्णय नहीं होने से हर कांग्रेसी स्तब्ध और दुखी है. चौधरी ने कहा कि युवाओं को इग्नोर करके ना तो कांग्रेस वापस सत्ता प्राप्त कर सकती है और ना ही कांग्रेस को पुनर्जीवित किया जा सकता है.

बाड़मेर में पत्रकारों से बातचीत में वन पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी ने यह बड़ा बयान दिया. पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट समर्थित नेताओं में शामिल हेमाराम चौधरी ने यह तक कह दिया कि 25 तारीख के घटनाक्रम पर पार्टी के संगठन महासचिव वेणु गोपाल ने 2 दिन में निर्णय की बात कही थी लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ. ऐसे में उसका क्या संदेश गया है. चौधरी ने युवाओं को पार्टी में मौका दिए जाने की वकालत भी की तो यह भी कहा कि युवाओं को मौका देते रहने पर ही प्रजातंत्र और कांग्रेस पार्टी मजबूत होगी.

हेमाराम चौधरी ने सचिन पायलट से जुड़े एक सवाल पर कहा कि सचिन पायलट जितना धैर्य तो कोई नहीं रख सकता. उन्होंने कहा 2 साल से ज्यादा समय हो गया सचिन पायलट किसी पद पर नहीं है फिर भी पार्टी के लिए कितना काम कर रहे हैं. यह किसी से छुपा हुआ नहीं है. उन्होंने कहा कि सचिन पायलट का आम जनता में क्रेज है और उनसे जुड़े कार्यक्रम में लोगों का हुजूम उमड़ता है. ऐसे में जो आदमी जनता में पसंद और लोकप्रिय हो उसे पार्टी को मौका देना चाहिए. यदि आप ऐसे लोगों को मौका नहीं देंगे तो पार्टी मजबूत कैसे होगी.

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बता दें कि राजस्थान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 3 दिसंबर को झालावाड़ के रास्ते प्रवेश करना प्रस्तावित है. उससे ठीक पहले अजय माकन के राजस्थान कांग्रेस प्रभारी पद छोड़ने की पेशकश से जुड़ी खबरें भी सुर्खियों में रही. उसके बाद आए पायलट समर्थित विधायक वेद प्रकाश सोलंकी और खिलाड़ी लाल बैरवा के बयान ने भी प्रदेश का सियासी तापमान बढ़ाया था. विधायक सोलंकी और बैरवा के बयान के बाद अब हेमाराम चौधरी के बयान में भी 25 सितंबर को हुए घटनाक्रम और उसमें अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं पर निर्णय किए जाने की मांग की गई है. जो राहुल गांधी की यात्रा से पहले कांग्रेस पार्टी के लिए परेशानी बढ़ाने के संकेत है.

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