टोंक में प्रशासन के कार्यक्रम में पहुंचे बीजेपी सांसद जौनपुरिया, पीएम मोदी को लेकर दिया ऐसा बयान

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Tonk’s BJP MP: प्रदेश में सत्ता परिवर्तन और अब अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के बाद बीजेपी (bjp) में जबरदस्त उत्साह है.टोंक (Tonk) में प्रशासन की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुछ ऐसा ही दिखा. जिला मुख्यालय पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम रखा गया. जिसमें स्कूली विद्यार्थियों नें हर बार की तरह फिल्मी गीतों पर नहीं, बल्कि हनुमान चालीसा और प्रभु श्री राम पर आधारित जोशीली प्रस्तुतियां देते हुए पूरे माहौल को राममय बना दिया. इन प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों से खचाखच भरे कृषि विभाग के ऑडिटोरियम में श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे.

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में टोंक-सवाई माधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया और अन्य बीजेपी पदाधिकारी भी मौजूद रहे. सरकारी कार्यक्रम में देश भक्ति के गीतों के अलावा प्रभु श्रीराम पर आधारित प्रस्तुतियों को देख ना सिर्फ आश्चर्यचकित, बल्कि भाव-विभोर भी नजर आए. इस मौके पर सांसद जौनपुरिया का बयान काफी चर्चा में रहा.

सांसद ने बयान दिया कि 500 साल बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में राममंदिर का निर्माण और वहां रामलला की प्राणप्रतिष्ठा हुई है. उसने हम सब को राममय कर दिया है. सांसद ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी राममय होना डबल इंजन की सरकार के बनने के बाद हमारी सोच में हुए बदलाव का स्पष्ट प्रतीक है.

सांसद जौनापुरिया ने कहा “इस धरती पर जब भी कुछ गलत हुआ है, उसे ठीक करने के लिये अवतारों हुए हैं. ठीक इसी तरह से मोदी हैं. सांसद ने कहा कि अगर देश में कांग्रेस के 55 वर्ष के शासन का अंत मोदीजी नहीं करते तो यह देश फिर से ग़ुलाम हो जाता. सांसद ने कहा कि जो काम किसी ने नहीं किया, वह मोदीजी ने कर दिखाया.”

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जौपनपुरिया बोले- मोदी को भगवान स्वरूप नहीं मानें तो क्या मानें

उन्होंने कहा कि 75 साल बाद राममंदिर का सपना साकार हुआ है और वह दिन दूर नहीं जब लूटा गया भारत अपना गौरव प्राप्त कर लेगा. सांसद ने कहा कि मथुरा और काशी भी उसी गौरवशाली भारत का हिस्सा हैं. सांसद जौनापुरिया बोले कि इसमे कोई शक नहीं कि पीएम मोदी भगवान श्रीराम का अवतार स्वरूप हैं. उन्होंने संत रूप धारण कर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर किए जाने वाली सभी औपचारिकताएं निभाई, ऐसे में उन्हें भगवान स्वरूप नहीं मानें तो क्या मानें.

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