आरक्षण के लिए भरतपुर-धौलपुर के जाटों ने शुरू किया महापड़ाव, मौके पर भारी पुलिस जाब्ता तैनात

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Rajasthan News Live: भरतपुर-धौलपुर के जाटों को आरक्षण देने के लिए सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला, जानें
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Mahapadav Of Jat Community For Reservation: राजस्थान में भरतपुर और धौलपुर के जाटों ने आक्षण के लिए फिर से आंदोलन की राह पकड़ ली है. जाट समाज ने केंद्र में ओबीसी वर्ग में आरक्षण की मांग के लिए बुधवार से मुंबई-दिल्ली रेलवे मार्ग से करीब 300 मीटर की दूरी पर जयचोली गांव में महापड़ाव शुरू कर दिया. लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2024) से पहले इससे निपटना राजस्थान की भजनलाल सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती होगी. जाट आंदोलन (Jat Movement) को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. इसके अलावा मुंबई-दिल्ली रेलवे मार्ग पर रेलवे पुलिस बल तैनात किया गया है.

भरतपुर धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने बताया कि भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को केंद्र में आरक्षण की मांग काफी पुरानी है. आज से महापड़ाव शुरू किया गया है लेकिन रेलवे मार्ग और नेशनल हाईवे को जाम करने का फैसला समाज कभी भी ले सकता है. उन्होंने कहा कि अभी हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण चल रहा है लेकिन सरकार ने नहीं सुनी तो कुछ भी हो सकता है.

सिर्फ भरतपुर-धौलपुर के जाटों को नहीं है आरक्षण

दरअसल राजस्थान के सभी जिलों के जाटों को केंद्र के ओबीसी वर्ग में आरक्षण प्राप्त है. लेकिन भरतपुर और धौलपुर के जाटों को आरक्षण नहीं मिला हुआ है. इसलिए यहां के जाट आरक्षण की मांग कर रहे हैं. आरक्षण की यह मांग 1998 से की जा रही है. 2013 में केंद्र की मनमोहन सरकार ने भरतपुर धौलपुर जिलों के साथ 9 राज्यों के जाटों को आरक्षण दिया था. लेकिन जब 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तो सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर 10 अगस्त 2015 को भरतपुर धौलपुर के जाटों का केंद्र और राज्य में ओबीसी आरक्षण खत्म कर दिया गया.

लंबी लड़ाई के बाद 7 साल पहले मिला राज्य में आरक्षण

लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 23 अगस्त 2017 को राज्य में दोनों जिलों के जाटों को ओबीसी में आरक्षण दिया गया. लेकिन केंद्र में ओबीसी में आरक्षण की मांग अभी पूरी नहीं हो पाई है. सितंबर 2021 में जब जाटों ने चक्का जाम का ऐलान किया था तब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 28 दिसंबर 2021 को दोनों जिलों के जाटों को केंद्र के ओबीसी वर्ग में आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश पत्र लिखा था. उसके बाद जाट समाज के नेता दिल्ली में ओबीसी कमिशन और केंद्रीय नेताओं से मिले लेकिन अभी तक आरक्षण नहीं मिल पाया.

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